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परिवहन विभाग वीवीआईपी नंबर बेचने में विफल रहा है और अब दोबारा से बोली लगानी पड़ेगी। प्रदेश में वीवीआईपी नंबर की बोली लगाकर धनराशि सरकार के खजाने में नहीं जा सकी। अब सरकार ने भले ही परिवहन विभाग के पोर्टल को कुछ दिनों के लिए निलंबित कर दिया है, लेकिन इस पोर्टल की खामियों के उजागर होने से कई तरह से सवाल उठने स्वाभाविक हैं।

बताते हैं कि परिवहन विभाग ने संबंधित विभाग से इस खामी को दूर करने का मामला भी उठाया था, लेकिन यह मामला ठंडे बस्ते में पड़ा रहा। वीवीआईपी नंबर के लिए लगी बोली ने पोर्टल की कमियों की पोल पट्टी खोलकर सामने रख दी। परिवहन विभाग अब पोर्टल की खामियों के दूर होने का इंतजार कर रहा है, ताकि फर्जी तरीके से बोली लगाने वालों पर नकेल कसी जा सके।

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